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Tuesday, September 27, 2011

बेटी और उसकी बातें














बेटी के नन्हें-नन्हें हाथ अब बड़े होने लगे हैं

खिलौनों के साथ किताबें-पेंसिल भी पकड़ने लगे हैं.

जुबां अब इसकी तुतलाती नहीं है

द,आ का डंडा,दा,द ऊ की मात्रा,दू,दादू पढ़ने लगी है.

फरमाईशें छोटी-छोटी करती है

सपने बड़े-बड़े देखती है.

कभी अकेले कमरे में बच्चों को पढ़ाती मिलती है

कभी हम सबको सुई लगाती फिरती है

स्कूल जाते वक्त कभी रोती नहीं

होम-वर्क किए बगैर कभी सोती नहीं.

कभी-कभी सहेलियों की देखा-देखी

बाइक से स्कूल जाने को कहती है.

समझाने पर पैदल ही मुस्कराती चली जाती है.

देख कर इसकी मासूमियत दिल भर आता है

फिर इसके बड़े-बड़े सपनो की खातिर

बहुत कुछ करने को जी चाहता है.

- नैना के पापा

 

Saturday, February 16, 2008

नैना

नैना

कोई तेरे होने पर मनाये खुशी
और कोई अफ़सोस
कोई तेरे आने पर दे बधाई
और कोई दे तसल्ली
ऐसा क्यूं होता हैं नैना ?

कोई तुझे चुनमुन पुकारे
और कोई नैना
कोई तुझे दुर्गा बोले
और कोई सुनयना
ऐसा क्यूं होता हैं नैना ?

कोई हँसे कि तू हँसे,
कोई रोये क्योंकि तू रोये
कोई खाये कि तू खाए
कोई सोये क्योंकि तू सोये
ऐसा क्यूं होता हैं नैना ?

कोई कहे यह लड़कियों की सदी
कोई कहे फिर भी लड़किया क्यू मार दी जाती है होने से पहले
कोई बोले बेटे होते बुढापे की लाठी
कोई बोले मेरी बेटी मेरे बुढापे की आँखे
ऐसा क्यूं होता हैं नैना ?


मेरी पहली पोस्ट मेरी बेटी के नाम, जब यह हमारी दुनिया में आई थी. 

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