Saturday, February 16, 2008

हमारी बेटी


नैना

कोई तेरे होने पर मनाये खुशी
और कोई अफ़सोस
कोई तेरे आने पर दे बधाई
और कोई दे तसल्ली
ऐसा क्यूं होता हैं नैना ?

कोई तुझे चुनमुन पुकारे
और कोई नैना
कोई तुझे दुर्गा बोले
और कोई सुनयना
ऐसा क्यूं होता हैं नैना ?

कोई हँसे कि तू हँसे,
कोई रोये क्योंकि तू रोये
कोई खाये कि तू खाए
कोई सोये क्योंकि तू सोये
ऐसा क्यूं होता हैं नैना ?

कोई कहे यह लड़कियों की सदी
कोई कहे फिर भी लड़किया क्यू मार दी जाती है होने से पहले
कोई बोले बेटे होते बुढापे की लाठी
कोई बोले मेरी बेटी मेरे बुढापे की आँखे
ऐसा क्यूं होता हैं नैना ?


मेरी पहली पोस्ट मेरी बेटी के नाम, जब यह हमारी दुनिया में आई थी. 

2 comments:

राजीव तनेजा said...

अति सुन्दर....भावनाओं से ओतप्रोत कविता....

लिखते रहें

अविनाश वाचस्पति said...

ढंग तो यही
है ... ना
कोई कहे
मै ... ना
और कहे कोई
मैं ... ना
नैनों में रहे
सदा सर्वदा
बनकर मैना.

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