Sunday, August 9, 2026

सुनो, याद है तुम्हें जब मैं तुमसे रोज के रोज खत लिखने की जिद्द करता था

19.


सुनो
याद है तुम्हें
जब मैं तुमसे रोज के रोज खत लिखने की जिद्द करता था
तब तुम कहती थीं कि रोज-रोज खत में मैं क्या लिखूं
मैं कहता था कि ' कुछ भी ' लिख दिया करो

तुम गाने लिख दिया करती थीं
मैं उन्हें पढ़कर 

तुम पर गुस्सा किया करता था

फिर तुम कहती थीं,
'तुमने ही तो कहा था,
'कुछ भी' लिख दिया कर
जब मैं 'कुछ भी' लिख देती हूं, 

तो मुझ पर गुस्सा करते हो 

तुम ही बताओ मैं क्या करूं ?'


दरअसल
मैं उन दिनों तुमसे खूब सारी बातें करना चाहता था 

अकेले मिलना

बातें करना

संभव ही नहीं हो पाता था 

इसलिए रोज ही ख़त लिखने की जिद्द किया करता था 

खतों के जरिए ही 

मैं अपने दिल की बात कह पाता था
तुम्हारे मन की बातें पढ़ पाता था.


पता है तुम्हें
अब मुझे भी हिंदी गाने पहले से ज्यादा पसंद आने लगे हैं
और तो और
अब मुझे कन्नड़, मलयालम, पंजाबी भाषा के गीत भी भाने लगे हैं
दूसरी भाषाओं के कुछ गीत तो मुझे इतने पसंद आने लगे हैं
कि वे मेरे कंप्यूटर में लूप में बजते रहते हैं.

पता है तुमको 

किसी-किसी गीत की कोई-कोई पंक्ति इतनी प्यारी होती है

वो दिल के किसी कोने में बैठ जाती है 

फिर धीरे-धीरे मिश्री की तरह घुलती जाती है 

और आप उस रस का स्वाद दिल से लेने लगते हैं.


जरा इस गीत के बोल तो सुनो 

'कोई नहीं मेरा, जरूरत तेरी 

लागे ना जिया, देखूं ना जो सूरत तेरी*...' 

अब इस पंजाबी गीत को सुनो  

'तू जो नज़रां मिलाइयां, असीं भुलिए किवें

तू जो नींदां चुराइयां, असीं भुलिए किवें

कहके हमदम कदी ते कदी बावरा

तू जो मोहब्बतां सिखाइयां, असीं भुलिए किवें*...'

कितने प्यारे हैं ये गीत

है ना!


पता नहीं तुमने ये गीत सुने हैं कि नहीं
यूं भी अब घर चलाने की जद्दोजहद में

तुम्हें वक्त भी कहां मिलता होगा 

पहले की तरह गीतों को गुनगुनाने का

इनकी धुन पर थिरक जाने का
सोचता हूं तुम्हें
अपनी पसंद के गीतों को सुनते हुए.

नोट- *ये पंक्तियां फिल्म 'मिस्टर एंड मिसेज माही' और पंजाबी फिल्म 'शायर' के गीतों की हैं.


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