Sunday, August 16, 2026

सुनो, मैं अब बदल गया हूं

20.

सुनो 

पता है तुम्हें 

मैं अब बदल गया हूं 

तुम्हीं तो कहती थीं 

'अब तू भी बदल जा 

सबके जैसा बन जा.'

सबके जैसा तो नहीं बन सका मैं 

लेकिन पता है तुम्हें 

मैं अब वैसी जिद नहीं करता 

जैसी पहले तुमसे किया करता था.

 

बाकी 

कल्पनाएं करना तो कब का बंद कर दिया था मैंने 

सपने देखना भी छोड़ दिया है अब तो मैंने 

घूमने-फिरने के ख्याल अब मन में नहीं आते 

नाटकों के पोस्टर भी अब खींचकर नहीं ले जा पाते 

आर्ट गैलरियां भी अब नहीं बुलाती मुझे 

साहित्य अकादमी लाइब्रेरी से आई चिट्ठी भी अब कहती है 

आप अपनी सदस्यता का नवीनीकरण क्यों नहीं कराते  

मिलने की भी तलब अब होती नहीं किसी से 

पता है तुम्हें अब तो मुझे गांव भी नहीं लुभाते. 


तुम्हें अब शायद ही याद होगा 

तुमने एक बार कहा था 

'किस्मत जिधर ले जाएगी चली जाऊंगी 

जिस मोड़ मुड़ने को कहेगी मुड़ जाऊंगी.' 

सालों बाद शायद ऐसा ही कुछ 

अब मैं भी अपने आप से कहने लगा हूं  

'अब बस मुझे रब की मर्जी विच ही रहणा है 

बल्कि अब तो उनसे भी मुझे कुछ नहीं कहना है.'


No comments:

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails