नेताजी
चुनावों का शंखनाद हो चुका
नेताजी की नींद अब टूट चुकी।
तैयार हैं सब अब
अपने अपने हथियारों से
कोई वादों से बहका रहा,
कोई भावनाओं को भड़का रहा।
जिसे देखो वही बड़ी-बड़ी बातें करता हैं
पर अपने ऐशो-आराम का पूरा ख्याल भी रखता हैं।
धूल से पैर ना सन जाए
इसलिए मँहगी गाड़ियों और हैलिकाप्टरों से दौरा करता हैं।
बातें गरीबों की खूब करता हैं
फिर ना जाने क्यों ?
करोड़ो रुपये अपने पास भी रखता हैं।
सत्ता के लालच में
दुश्मन को दोस्त
दोस्त को दुश्मन बनाया करता हैं।
मिल जाए जब सत्ता
होकर आम जनता से दूर
आलीशान कोठियों और दफ़्तरों में
सत्ता का रस पीया करता हैं।
आओ फिर भी वोट करें
अपने नेता के काम को
लौकतंत्र की तराजू में तौल चलें।
जिस जिस नेता ने दिखाई हो होशियारी
उनकी तो आँखे खोल ही चलें।