5.
सलीम- अपने आप को सोने की चिड़िया क्यों कहा तुमने.
नजमा- बस यही नहीं बता सकती, अगर कहीं आप समझ गए, मुझे माफ कर दीजिए, और ना समझे तो भूल जाईएगा.
सलीम- भूलने की शर्त तुम नहीं लगा सकती.
नजमा- आप मुझ से तो ज्यादती कर ही रहे हैं, अपने फन के साथ भी इंसाफ नहीं कर रहे.
सलीम- जो फन तुम्हारे और मेरे बीच दीवार बन जाए,मैं उसे छोड़ना पसंद करुंगा.
नजमा- मैं आपके फन की बहुत कद्र करती हूं सलीम साहब.
सलीम- लेकिन चाहती नहीं मुझे .
नजमा- आपसे शादी नहीं कर सकती, खुदा हाफिज.
सलीम- सुनो अगर कहीं मुलाकात हो गई.तो पहचान लोगी मुझे.
नजमा- सलाम जरुर करुंग़ी.
['बाजार' फिल्म से]

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