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Friday, April 4, 2008

चेहरो पर मुखौटे

मुखौटे 

पत्थरो के इस जहाँ में इंसानियत को ढूढता हूँ
मैं ना जाने क्यूँ भगवान को ढूढता हूँ।

टेढे रास्ते चलोगे सब साथ हो लेंगे
सीधे रास्ते चलोगे सब साथ छोड़ चलेंगे
ये दुनिया वाले चेहरो पर मुखौटे लगाते मिलेगे।

भावुक आदमी मिला तो इस्तेमाल कर लेंगे
चालाक आदमी मिला तो सलाम कर देंगे
ये दुनिया वाले चेहरो पर मुखौटे लगाते मिलेगे।

जरुरत पड़ने पर माँ-बाप का हाथ थाम लेंगे
आया जब हाथो में जोश, माँ-बाप के साये से भाग लेंगे
ये दुनिया वाले चेहरो पर मुखौटे लगाते मिलेगे।

अच्छे का दम भरते लोग गाँधी, भगत सिंह की जय-जय कार करते मिलेगे
पर अपने बच्चो में गाँधी, भगत सिंह के विचार पैदा नहीं करेंगे
ये दुनिया वाले चेहरो पर मुखौटे लगाते मिलेगे।

किसी के जीते जी उसके दुख में शामिल ना होंगे
पर उसके मृत शरीर के पास दिखावटी अफसोस जताते मिलेगे
ये दुनिया वाले चेहरो पर मुखौटे लगाते मिलेगे।

भगवान भक्त धार्मिक जगहों पर ईश्वर को पूजते फिरेंगे
देखना ये सब तरफ ईश्वर के बनाये बंदे को कष्ट देते मिलेगे
ये दुनिया वाले चेहरो पर मुखौटे लगाते मिलेगे।

पत्थरो के इस जहाँ में इंसानियत को ढूढता हूँ
मैं ना जाने क्यूँ भगवान को ढूढता हूँ।

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