Showing posts with label तुकबंदी .अकविता. Show all posts
Showing posts with label तुकबंदी .अकविता. Show all posts

Monday, March 30, 2009

बस का सहयात्री


वह  

रोज इंतजार किया करता था वह मेरा  
डी.टी.सी की बस नम्बर 234 में 
पहनकर काली पेंट और सफेद कमीज़  
लगाकर आँखो पर काला चश्मा 
लेकर साथ अपने एक काला बैग 
चढ़ते ही बस में मेरे 
बैठने की जगह बना दिया करता था  
बतलाता था 
खिलखिलाता था 
यूँ तो शादीशुदा था 
पर बातें बच्चों सी किया करता था
ना जाने कैसे और कहाँ से 
सारे जहान के दुखों की खबर भी रखा करता था 
खड़ा होकर स्टैण्ड से पहले ही 
गेट पर पहुँच जाया करता था
उतर कर स्टैण्ड पर   
छड़ी बैग से निकाल 
सड़क पार किया करता था 
सोचता हूँ तो सिरह उठता हूँ 
कैसे हर पल वह जिया करता था   

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails