सपने में आई
एक लड़की
अनदेखी-सी
अनजानी-सी
पर लगती थी
पहचानी-सी.
अनदेखी-सी
अनजानी-सी
पर लगती थी
पहचानी-सी.
बतला रही थी
खिलखिला रही थी
जीने की आरजू जगा रही थी
फेर कर उंगलियाँ बालों में मेरे
खूब सारा दुलार लुटा रही थी.
बैठाकर फिर मुझे साईकिल पर
मेरे सपनों को पंख लगा रही थी
फिर कुछ दूर चली
और बोली
चल यार ऐसा करते हैं
किसी चेहरे पर मुस्कान रखते हैं
बहुत दिन हो गए
आसमान को एक ही रंग में रंगे हुए
आ अपने सपनों का रंग उस पर रंगते हैं.
चल यार ऐसा करते हैं
किसी चेहरे पर मुस्कान रखते हैं
बहुत दिन हो गए
आसमान को एक ही रंग में रंगे हुए
आ अपने सपनों का रंग उस पर रंगते हैं.
तलाशता रहा जिसे जिंदगी की गलियों में
ना जाने क्यूँ वो सपनों में
अक्सर मुस्कराती हुई मिला करती है.