Saturday, February 14, 2026

प्यार का दिन और सीरो-सत्ता













पिछले दिनों एक रील में पंजाब यूनिवर्सिटी के अंदर किसी लड़की के द्वारा गाया गीत सुना था. गीत के बोल थे.

तू जो नज़रां मिलाइयाँ, असीं भुलिए किवें।
तू जो नींदां चुराइयाँ, असीं भुलिए किवें।
कहके हमदम कदी ते कदी बावरा।
तू मोहब्बतां सिखाइयाँ, असीं भुलिए किवें।
गीत थोड़ा समझ आया, दो-एक शब्दों के अर्थ समझ नहीं आए. लेकिन इसमें 'कुछ' था जो मुझे पसंद आ रहा था. पंजाबी बोल सुकून दे रहे थे. बस फिर क्या था. उस गीत का मतलब जानने की इच्छा हुई. उस 'कुछ' को पकड़ते हुए, एक दोस्त से उसके मतलब जाने. फिर गूगल पर उस गीत को ढूंढता रहा. वो मिल नहीं रहा था. रात हो चुकी थी. पर मैं लगा रहा. आखिरकार पता चला कि यह गीत एक 'पंजाबी फिल्म' 'शायर' का गीत है. फिर वो गीत लूप में चलता रहा. फिर इसी फिल्म का दूसरा गीत सुना. वो भी लूप में चलता रहा. फिर रात में ही सारे गीत सुन डाले. फिर अगले दिन काम करता रहा और ये गीत लूप में चलते रहे. कई दिनों तक इन गीतों के जादू ने मेरे को घेरे रहा. फिर एक दिन YouTube पर एक रील मिली, जिसमें इस फिल्म का आख़िरी सीन था. उसमें नायक अपनी लिखी नज्म सुनाता है. उस नज्म में आए शब्द दिल को भीगो गए. पहले की तरह कई शब्द समझ में नहीं आए. कुछ का मतलब पता नहीं चला लेकिन इसमें भी 'कुछ' था जो बेहद पसंद आ रहा था. फिर मैं फिल्म देखने के लिए छटपटाने लगा. फिर कई दिन छटपटाने के बाद फिल्म देखने का जुगाड़ हो गया. फिर क्या था रात को ही फिल्म देख डाली. फिल्म के एंड ने भावुक कर दिया. फिल्म का आख़िरी सीन भी लूप में चलता रहा. नायक के द्वारा कही नज्म मन को छूती रही. मैं उसे बार-बार सुनता रहा. बार-बार ही उसके भावों में बहता रहा. फिर समझ आया वो जो 'कुछ' था ना. वो 'कुछ' नहीं, प्यार था, मोहब्बत थी, जो पंजाबी शब्दों के जरिए मेरे को भावविह्वल कर रही थी.

याद के लिए फिल्म का एक संवाद बड़ी मुश्किल से पंजाबी बोली में लिख पाया. कुछ शब्द फिर भी सही से लिखने से रह गए लेकिन भाव समझ में आ रहे हैं. आपका मन करे तो भावों की नदी में आप भी डूबकी लगा लीजिए.  


सीरो- दुखी ना हो बापू. तू मेरे नाल कुछ गलत नी किता. बस इना जरूर है के, तेरी शान तल्ले संसार इतना चंगा लगदा सी, उतना सच्ची-मुच्ची है नी. घबरा ना बापू, तगड़ी है तेरी धी. ऐ नी हारदी. बापू - पुत्त, तू की हाल बना लिया आपणा, किना रोग ला लिया अपने आप नूं. तू चल मेरे नाल. आ शाबाश मेरी धी, चल मेरे नाल. छड्ड दे ये सारे बोझ. छड्ड दे. सीरो - बापू, जद्दों घर तां रहा मैं धी दा फर्ज अदा कितातां. हूण बीवी दा कर रही हां. इस दरवेश ने कदे साथ नी छड्ड्या. जदों लोग मैनूं कलहणी कह रहे सन, ओदों वी मेरे नाल सी. हूण अब फर्ज मेरा. बापू, तू दस. तेरे चेले किवें ने? बापू - मैं ठीक हां. ते चेले. ओह मुड़ के कदे नहीं आया. अपने घर वी नहीं गया. पता नहीं कित्थे चला गया. सीरो - हूणा यही करना सी. बेसब्र कां सब्र कित्थे सी. ओह मैनूं लੱਭण ( ढूंढने)वास्ते निकल गया होवे, ते आपणा आप ही खो बैठा होवे. चंगा होवे जे ओह अखां नाल सांझ पा लेवे, ते फिर शायर बन जावे. मोहब्बत लिखण लग जावां. बापू - सीरो पुत्त, तैनूं सत्ता बहुत याद आउंदा है. सीरो - यादां नूं कौन रोक सकदा है बापू जी. कदे-कदे मैं दुआ करदी हां कि ओह शायर बन जावे. पर हर रोज़ दुआ करदी हां कि मेरा शोहर ठीक हो जावे. अतीत नूं सिर्फ़ याद किता जा सकदा है. पर सानूं मौजूदा वक्त नाल ही जीणा पैंदा है. इकबाल - सीरो, कोई बोल तां दे. सीरो - नहीं इकबाल. होण मैनूं बोल नहीं ओंदे. मेरे बोल तां उत्थे ही रह गए, सत्ते कोल. हां, एह समझ लै कि ओह मैनूं शायरी दा.... (उपहार) मंग्या ते, मैनूं उन्हां बोल दे दिते. होण तां जे ओह बोले, तां मैं बोलां.

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