वही सूरज है
वही तुम हो
वही मैं हूँ
वही तकलीफें हैं
वही मुश्किलें हैं
और
वही डर
सब संग-संग ही तो हैं.
बेटी बोली
ना-ना
सुनो आप मेरी बात
नया जैसा कुछ नहीं होता है
नया तो बस एहसास होता है
आप सोचो यह नया साल है
यह उसका सुंदर-सा पहला दिन
बस तुम सोचो
और चुरा लो
इन तकलीफों में से
इन मुश्किलों में से
एक पल
और फिर
मुस्करा दो
यूं ही मेरी किसी बात पर
या फिर
अपनी ही किसी बात पर
और
बस आप सोचो
यह नया साल है!

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