Tuesday, January 5, 2010

किताबें













किताबें 

किताबें
रंग बिरंगी
छोटी-बड़ी
मोटी-पतली
अलमारी में से
हर पल झाँकती हैं।

फिर आकर पास मेरे
हँसाती हैं, रुलाती हैं
देर तक मुझसे बतियाती हैं
जब छोड़े सारी दुनिया
तब मेरा साथ निभाती हैं।

"माँ"
हाथ पकड़कर चलना सिखाती है
"मुझे चाँद चाहिए"
सपनो को पँख लगाती है
"पीली छतरी वाली लड़की"
इश्क की महक से महकाती है
"नास्तिक शहीद "
जीने का मकसद बताती है।


नोट- आजकल साथियों किन्हीं कारणों से ब्लोगजगत पर ज्यादा समय नही दे पा रहा हूँ। उसके लिए माफी चाहूँगा और साथ ही आप सभी साथियों को नववर्ष की ढेरों शुभकामनाएं देना चाहूँगा।

22 comments:

वन्दना said...

bahut sundar bhav.

HAPPY NEW YEAR TO U N UR FAMILY AUR NAINA KO BAHUT BAHUT PYAR.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

वाकई किताबे ही सच्ची दोस्त है ...आपको भी नए साल की बहुत बहुत बधाई ...शुक्रिया

अनिल कान्त : said...

kitabon ke baare mein bahut sahi kaha aapne

ताऊ रामपुरिया said...

अत्यंत खूबसूरत.

रामराम.

डॉ .अनुराग said...

gulzar ki ek nazm hai....kitabe jhankti hai band almaari se .....shayad padhi ho..yahi hal byaan karti hai...

रावेंद्रकुमार रवि said...

किताबें तो होती ही हैं -
सबसे अच्छी दोस्त!
जरूरत होती है -
उनकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाने की!
ओंठों पर मुस्कान खिलाती शुभकामनाएँ
नए वर्ष की नई सुबह में महके हृदय तुम्हारा!
संयुक्ताक्षर "श्रृ" सही है या "शृ" FONT लिखने के 24 ढंग
"संपादक : सरस पायस"

अमिताभ श्रीवास्तव said...

kitabe sachchi dost hoti he, bahut si pustako me padhhaa..kitabe jeevan ka hissa he, jnhaa ham apane se alag hat kar bhi jeevan ke kai rang aour roop dekh sakte he, samjh sakate he. aapki rachna me jo yah baat he na ki-हर पल झाँकती हैं।
bas yahi to jeevan he jo jhaank kar hame lubhata he, bulata he aour isi ki aagosh me khokar ham apane man-mastishk ki tamaam indriyo ko aatmsaat kar lete he. jesa ki aapne likhaa bhi he ki-
फिर आकर पास मेरे
हँसाती हैं, रुलाती हैं
देर तक मुझसे बतियाती हैं
जब छोड़े सारी दुनिया
तब मेरा साथ निभाती हैं।
aour jin kitabo ke naam aapne apni rachna me bakhoobi se istmaal kiye ve to laajavaab he hi.., sushilji, bade dino baad blog par aaye,,khoobsoorat se rachnaa se hame aapne baandh liya.., meri shubhkamnaye he aapke saath..jab bhi samay mile tab blog par aaye aour apne rachnatmak vicharo se saraabor kare.

अमिताभ श्रीवास्तव said...

NAINA BITIYA KE LIYE, AOUR KHABARDAAR jo AAPNE PADHHA-vese aap nahi padhenge to bitiya ko bataayegaa koun? so padhhiye aour bitiya ko bataiye.
naina beta- sardi me vese hi sab jam rahaa he, dahi se naak-galaa sab jam jaataa he..aapne ye kamaal kiyaa he ki paani ko hi lassi banaa pi rahi ho.., yaani aap samjhdaar jyadaa hui, mammi-papa se../
naya saal aapko bahut saaraa PYAAAR aour hamare AASHEERVAAD. khoob padhho-likho aour hamesha avval raho. PYAAR SAHIT
AAPKA CHACHA_

कुश said...

किताबो से तो अपनी पुरानी यारी है..

Manish Kumar said...

sahi kaha aapne kitabon ke bare mein. nav varsh ki hardik shubhkaamnayein

गौतम राजरिशी said...

जिन किताबों के नाम गिनाये, उनसे हमारी अलमारी भी सुगंधित है।

नैना की बनायी हुई लस्सी हमें कब मिलेगी। नये साल पर नैना बिटिया को खूब सारा दुलार-मलार और समस्त शुभकामनायें कि अपने पापा के नाम को खूब-खूब रौशन करे...

नीरज जाट जी said...

"नोट- आजकल साथियों किन्हीं कारणों से ब्लोगजगत पर ज्यादा समय नही दे पा रहा हूँ। "
sir ji, hame to maaloom hai ki kya kaaran hai.
good kavita.

मीत said...

भाई रचना तो आपने सचमुच बेहतरीन लिखी है...
जवाब नहीं... किताबें ही तो जीवन सवारने की ताकत रखती हैं, और सबसे अच्छी दोस्त होती हैं...
@ नैना
बिटिया हैप्पी न्यू इयर...
अगर मम्मी दही नहीं जमाती तो कोई बात नहीं तुम दूध की लस्सी बना कर पी लिया करो चाकलेट दाल कर... भला हमारी भतीजी पानी की लस्सी क्यों पीये...
मीत

psingh said...

बहुत सुन्दर रचना
बहुत बहुत धन्यवाद

अविनाश वाचस्पति said...

सिर्फ चाहते ही रहोगे या दोगे भी। पर हमारी शुभकामनायें तो ले ही लो। किताबों के बहाने अकेलेपन चले भुनाने। वैसे एक सच्‍चाई है किताबें अकेला भी कर देती हैं पर जीवन में रंग विविध भर देती हैं।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

किताबें गूंगे मित्रों की सी होती हैं. सुनती हैं पर कहती कुछ नहीं अलबत्ता बताती बहुत कुछ हैं.

अल्पना वर्मा said...

किताबों से अच्छा साथी कौन है?मौन रखती हैं और कितना कुछ दे जाती हैं.
अच्छी लगी कविता .
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नये साल की,Lohri और मकर संक्रांति की ढेरों शुभकामनाएँ.
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***नैना बेटे सर्दी बहुत है अपना ख्याल रखा करो..सर्दी में लस्सी कौन पीता है?फिरभी दही jamaani है तो मम्मी को कहो कसेरोल में थोड़ा गरम पानी डाल कर उस में दही जमाने के लिए [अलग बर्तन में]रख कर बंद कर के रखो--देखो कितनी जल्दी जमेगा दही!
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नीरज गोस्वामी said...

ब्लॉग पर आपकी कमी खलती है पर शायद आप अधिक आवश्यक कार्य में व्यस्त हैं...वो करें..इश्वर आपको कामयाबी दे...नव वर्ष की आपके सम्पूर्ण परिवार को शुभकामनाएं...देर से ही सही.
नीरज

हरकीरत ' हीर' said...

माँ"
हाथ पकड़कर चलना सिखाती है
"मुझे चाँद चाहिए"
सपनो को पँख लगाती है
"पीली छतरी वाली लड़की"
इश्क की महक से महकाती है
"नास्तिक शहीद "
जीने का मकसद बताती है।

बहुत खूब .....!!

Prerna said...

pustakein agar best friend ban jae to jeevan mein kisi ki zaroorat nhi...bahut khoob!

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

लाजवाब... बहुत ही अच्छी रचना.....

aas said...

books is a good friend of every life.without books a man's life is small.the books expand the mind of a man.

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