Wednesday, November 11, 2009

सपने वाली लड़की

सपने वाली "कल्पना" 











सपने में आई एक लड़की
अनदेखी सी
अनजानी सी
पर लगती थी
पहचानी सी
बतला रही थी
खिलखिला रही थी
जीने की आरजू जगा रही थी
फेर कर उंगलियाँ बालों में
खूब सारा दुलार लुटा रही थी
बैठाकर फिर मुझे साईकिल पर
मेरे सपनों को पंख लगा रही थी
कुछ दूर चली और बोली
चल साथी ऐसा करते है
किसी चेहरे पर मुस्कान रखते है...........
बहुत दिन हो गए
आसमान को एक ही रंग में रहते
आ अपने सपनों का रंग उस पर रंगते है.....
तलाशता रहा जिसे जिंदगी की गलियों में
ना जाने क्यूँ?
वो सपनो के चौराहों पर
मुस्कराती मिला करती है। 

नोट-ऊपर दी हुई सुंदर फोटो विजेन्द्र जी के हाथों का कमाल है। आप उनकी लेखनी और पेंटिग्स का आनंद लेना चाहते है तो http://vijendrasvij.blogspot.com/ पर चटका लगाकर ले सकते है। विज भाई का बहुत शुक्रिया।

21 comments:

सुलभ सतरंगी said...

आखरी पंक्तियाँ भली लगी.

Mithilesh dubey said...

बेहद खूबसूरत रचना व लाजवाब अभिव्यक्ति ।

मीत said...

सुंदर और प्रेम का एहसास कराती हुयी रचना है... बेहद अच्छी लगी...
चित्र बहुत ही सुंदर है...शौक तो हमें भी है पर बना नहीं पाते...
दो बेहतरीन रचनाओं से मुलाकात करवाने के लिए धन्यवाद आपका सुशील जी...
@ नैना

बेटा हम मम्मी को समझा देंगे की आप अभी शरारत नहीं करोगी तो फिर कब करोगी... आप ढेर सारी शरारत किया करो... पापा मम्मी को हम देख लेंगे..
मीत

डॉ .अनुराग said...

बलिश्त भर के सपने

अल्पना वर्मा said...

sapne...sapne hi hote hain.

achchee kavita.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

मीठे सुन्दर सपने जो अक्सर यूँ ही लफ्जों में ढल जाते हैं ...

kshama said...

Sapnon ke chaurahe pe yun kisee ka milna aur, aasmaan zindagee ke khushnuma rangon me ragne ke liye kahna, apne aapme ek swanwat kalpana hai...!

Nirmla Kapila said...

सुन्दर सपनो के लिये शुभकामनायें

गौतम राजरिशी said...

सपनों के इस चौराहे पर मुस्कुरा के तो हम सब से मिलती है ये लड़की, किंतु आपने इसका इतनी खूबसूरती से शब्द-चित्र खींचा है कि क्या कहने!

विजेन्द्र जी का कमाल भी लाजवाब है।

नैना का मासूम सवाल यहाँ इतनी दूर ठहाके लगवा गया है।

अमिताभ श्रीवास्तव said...

sushilji,
aapke sapane se ham bhi saraabor hue. rachna behad saral aour apni bhav abhivyakti rakhane me kaamyaab he.
aour yah chitr gazab ka he...vijendraji ke blog par jaanaa hoga.
naina bitiya ki maasoomiyat ke bich sachcha saa javaab satik he. ..kya papa masti karenge.../vese bitiya ko kahe ki papa bhi kam bachche nahi he..dono masti kijiye../

ओम आर्य said...

बहुत ही सुन्दर ख्यालओ से से सज्जी है आपकी रचना!बधाई!

क्रिएटिव मंच said...

खूबसूरत रचना
और
लाजवाब अभिव्यक्ति

शुभकामनायें



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क्रियेटिव मंच

राज भाटिय़ा said...

तलाशता रहा जिसे जिंदगी की गलियों में
ना जाने क्यूँ?
वो सपनो के चौराहों पर
मुस्कराती मिला करती है।
जबाब नही आप की रचना का बहुत खुबसुरत.
धन्यवाद

Harkirat Haqeer said...

तलाशता रहा जिसे जिंदगी की गलियों में
ना जाने क्यूँ?
वो सपनो के चौराहों पर
मुस्कराती मिला करती है।

सुशील जी सपने में ही सही मिली तो .......!!

अमिताभ श्रीवास्तव said...

kahate he sapane hamare kisi anchahe se drashyo ko poora karte he..vese janhaa tak me aapko jaantaa hu, kisi ladaki ka sapane me aanaa aapke liye aprtyashit he he, kher..jab aa hi gai he to to rachna bhi bana gai/
sapane me जीने की आरजू jagaana..apane aap me kamal he..vese bhi ham jaagrat avastha me jeenaa kho chuke he, ab to yah sapane ki hi baat ho gai, aapne bahut sadhaa saa likhaa he, yathaartha likha he/aour yah baat
ki मेरे सपनों को पंख लगा रही थी
bahut azeeb he..sapane me sapano ko pankh lagaana, maano aap kisi svarg ke doure par ho..amooman esa hota nahi..magar aapki lekhani ne is baat ko bahut gambhirta se rakh diya./किसी चेहरे पर मुस्कान रखते है..........., ynha..kitana samarpan he..vo jaanti he aap ko khushi di he..kintu use vishvaas he aapke saath vo kisi chehre par muskaan bikher sakati he.
बहुत दिन हो गए
आसमान को एक ही रंग में रहते
आ अपने सपनों का रंग उस पर रंगते है.....
ye bahut badi baat likhi he aapne, is aapadhaapi vaale jeevan me hamne rang bharna hi maano tyaag diya he...fir yadi is aasmaan pe sapano ka rang bharne ka anurodh ho to..jeevan ki kai saari parte khul jaati he/
वो सपनो के चौराहों पर
मुस्कराती मिला करती है।
ynha bhi aapki khoobi dikhi- sapano ka chouraahaa, yaano chaaro aour jaane vale raaaste par muskurana..yaani har kanhi usaka milana..yaaani khushi jo he use apana rang mil jaanaa/ yaani ek sundar bhavishya ki kalpana/ yaani fir sapane me kho jaanae ki chaahat.

Udan Tashtari said...

बेहतरीन सोच!!


विज़ की कलाकृतियों का तो जबाब नहीं.

योगेन्द्र मौदगिल said...

बेहतरीन रचना साधुवाद स्वीकारें......

काजल कुमार Kajal Kumar said...

बहुत सुंदर भाई, एक सपने की ही मानिंद अनुभूति. आभार.

Reetika said...

pyari si rachna !!

वन्दना said...

bahut hi manbhavan rachna........kash aapka ye sapna sach ho jaye.

naina bitiya.
khoob sharartein karo aur mummy papa ko aur tang karo........are tumhare hi to shararat karne ke din hain...........tumhari yahi sharartein hi to tumhare bade hone ke baad yaad aaya karengi.

श्रद्धा जैन said...

bahut bahut sunder kavita

jaane kyu sapno mein mila karti hai

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