सत्ते- बोलैंगी नहीं कुछ.
सीरो- की बोलां!
सत्ते- कुछ भी.
[ पंजाबी फिल्म 'शायर' से.]
किसी को फसल के अच्छे दाम की तलाश,किसी को काम की तलाश,किसी को प्यार की तलाश, किसी को शांति की तलाश, किसी को खिलौनों की तलाश,किसी को कहानी की तलाश,किसी को प्रेमिका की तलाश, किसी को प्रेमी की तलाश,................ तलाश ही जीवन है
3.
माया- बिना बताए चले जाते हो. जाके बताऊं कैसा लगता है!
1.
महेंद्र- अब भी माचिस रखती हो? पहले तो मेरे लिए रखती थीं और अब.
सुधा- अब अपने लिए रखती हूं.
महेंद्र- मतलब सिगरेट पीना शुरु कर दिया क्या?
सुधा- नहीं. आपकी भूलने की आदत नहीं गई. मेरी रखने की आदत नहीं गई.
2.
महेंद्र- चश्मा कब से लगाने लगीं?
सुधा- दो-ढाई साल हो गए हैं.
महेंद्र- अच्छा लगता है. समझदार लगती हो.
सुधा- पांच साल पहले समझदार नहीं लगती थी?
महेंद्र- लगती थी. अब ज्यादा लगती हो.
सुधा- आपने दाढ़ी कब से बढ़ा ली?
महेंद्र- कुछ दिनों से. क्यों मैं समझदार नहीं लगता?
['इजाजत' फिल्म से ]