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Sunday, December 28, 2025

सुनो आखिर कब तक तुम सपनों में आती रहोगी...

13.


सुनो 

कभी-कभी 

यूं ही बैठे-बैठे 

सोचता हूं मैं 

तुम अपने मन की बातें 

अब किससे कहती होंगी?


14.


सुनो 

पता है तुम्हें 

तुम मुझे इतनी अच्छी क्यों लगती थीं 

दरअसल तुम मुझे समझती थीं 

इसलिए इतनी अच्छी लगती थीं.


15.


सुनो 

आखिर कब तक तुम 

मेरे सपनों में आती रहोगी 

कभी सपनों से निकलकर 

मुझसे मिलने आओ 

बहुत कुछ कहना है मुझे 

कुछ तुम्हें भी तो कहना होगा.


Saturday, March 14, 2009

मुझे किस किस ने बिगाड़ा और जीवन संवारा।



मैं तो प्रतिदिन यही अनुभव करता हूँ कि मेरे भीतरी और बाहरी जीवन के निर्माण में कितने अगणित व्यक्तियों के श्रम और कृपा का हाथ रहा हैं और इस अनूभूति से उददीत मेरा अंतक:करण कितना छटपटाता है कि मैं कम से कम इतना तो दुनिया को दे संकू जितना मैंने उससे अभी तक लिया है।  - आंइस्टीन 
अभी 8 मार्च को कंचन जी ने एक पोस्ट की थी। जिसे पढ़कर आंइस्टीन जी का यह कथन याद आ गया। कंचन जी ने उस पोस्ट में पूछा था कि " उन तीन पुरुष और तीन महिलाओं का नाम बताईए जिनका आपके व्यक्तित्व निर्माण में बहुत बड़ा हाथ है।" वैसे ये सच में ही बड़ा मुश्किल काम हैं। पर ज्यादा गहराई में ना जाकर बस चंद पल सोचकर जो दिमाग में आया वही लिख रहा हूँ।  

सबसे पहले बेझिक पहला नाम ले सकता हूँ, वो हैं मेरे गुरु चरण दास सिधू जी । जिनसे मैं बहुत प्रभावित रहा हूँ। जिनके बारें में जितना लिखा जाए उतना कम है। पर यहाँ एक चीज का जिक्र करुँग़ा। उन्होंने अपनी एक किताब में कहीं कहा था कि " अगर सैल्फ ऐक्सप्रेशन न मिले, घुटन अंदर से न निकले, दिल की गांठे न खुलें, तो लड़के लड़कियाँ नशे पीने लग जाते हैं। क़ातिल बन जाते हैं। पगला जाते हैं। कट्टरपंथी मौत के फरिशते बन जाते हैं। इसका एक ही इलाज है: आत्म अभिव्यक्ति।" इसी आत्म अभिव्यक्ति की लौ इन्होंने ही जगाई थी मेरे अंदर। दिल में बहुत गुबार होते थे जिन्हें मैं नही निकाल पाता था। लोगों ने मजाक बनाया मेरा। एक यही थे जिन्होंने लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। शायद अवसाद में जाने से बचा लिया। उनका सीधा, सादा, नम्र जीवन जीना मुझे हमेशा आकर्षित करता रहा है। आज इनका जन्मदिन भी हैं। और आज के ही दिन मैं इनसे मिला भी था। आज के दिन इस पोस्ट को करने का कारण भी। दूसरा नाम मैं अपने पिता जी का लूँगा। जिन्होंने जिदंगी में लड़ना सिखाया। मुसीबत में भी जीने का ज़ज़्बा बनाए रखना सिखाया। जब भी कभी हमारे घर में कोई मुसीबत आई हमेशा पिता जी ने कहा कि " हाथ नहीं गड़े जमीन में अभी मेरे।" तीसरा नाम मैं एक लड़के का लूँगा जिसका मुझे नाम भी नही पता। पर कुछ पल के लिए आया था मेरी जिदंगी में। वह मुझे एक दिन लाईब्रेरी के बाहर मिला। एक फटी सी कमीज पहने। मेरे पास आकर एक रुपया माँगने लगा शायद उसे बहुत भूख लगी थी और मैंने उसे दो रुपये का सिक्का दे दिया। वह भागकर ब्रेडपीस ले आया और एक रुपया मेरी हथेली पर रखकर, मुझे ईमानदारी का पाठ पढ़ा गया।  वह मुझे बता गया कि भुखमरी और गरीबी में भी ईमानदारी नही मरती। और हम हैं कि ईमानदारी का बस ढोल ही पीटते रहते हैं। उस लड़के पर एक पोस्ट की थी एक सात आठ साल का लड़का और भूख   के नाम से। 

पहला नाम मैं यहाँ अपनी मम्मी जी का लूँगा। जिन्होंने सबसे प्यार करना सिखाया। गिले शिकवे चंद पल के लिए होने चाहिए। आखिर एक इंसान ही तो एक इंसान के काम आता है। "कोई तुम्हारें लिए क्या करता है यह मह्त्वपूर्ण नही हैं बल्कि तुम क्या करते किसी के लिए यह महत्वपूर्ण।" दूसरा नाम एक लड़की का। इस लड़की से भी एक ही बार मिला। उन्होंने बात ही बात में एक बात कही थी कि " अगर भगवान या इंसान तुम्हें दुख देकर अंचभित करें तो तुम भी उस दुख में खुश रह कर उसे अंचभित कर दो। मतलब हमेशा खुश रहो बस।" तीसरा नाम मैं अपनी बेटी का लूँगा। सुनयना ( यह नाम सिधू सर जी ने रखा था हमारी नैना के लिए) जो मुझे यह सिखाती है कि जो चीज जहाँ से उठाओ उसको वही रखों। यह आदत उसे किसने सीखाई मुझे पता नही पर वह मुझे जरुर सिखाती हैं।  

और जाते जाते सिधू सर जी को जन्मदिन की ढेरों मुबारकबाद और शुभकामनाएं देते हुए उनकी एक रचना जो उन्होंने नौवीं या दसवीं जमात में पढते हुए लिखी थी, आप साथियों के लिए प्रस्तुत करना चाहूँगा।  

उठ जाग अंधेरे में से तू, 
तेरा प्रीतम तेरे दिल बसता। 
नहीं स्वर्ग कोई आसमानों में, 
धरती को स्वर्ग बना, बंदे। 
कर ख़त्म ग़ुलामी, बंदर-बाँट, 
बंदे को रब्ब बना,बंदे। 
तू कामगार ही सिर्जनहार, 
क्यों पत्थरों पंडों में फंसता? 

उठ जाग अंधेरे में से तू, 
तेरा प्रीतम तेरे दिल बसता। 
सब भरम भुलावे छोड़ दे अब, 
तू सीधे रस्ते चल, बंदे। 
रब्ब ढूंढने के ढंग बदल गए, 
रब्ब इक दूजे को कह, बंदे। 
क़ादर क़ुदरत क़ुदरत क़ादर,
हर पीर पैग़ंबर है कहता। 


नोट- ऊपर की गई पोस्ट में पाँच लिंक है हरे रंग में, अगर समय हो तो उस लिंक पर क्लिक करके उस पोस्ट को भी पढ सकते हैं। और अपना अमूल्य कमेंट दे सकते है। शुक्रिया। 









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