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Tuesday, January 20, 2026

आधे-अधूरे ख्याल-4

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कुछ लोग आपके नजदीकी नहीं होते लेकिन आपके नजदीक होते हैं.
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कोई-कोई खुशी इतनी बड़ी लगती है कि उसके बदले मिली तकलीफें छोटी लगने लगती हैं!
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जब जवान बेटा बीमार हो जाता है, तब बूढ़ा बाप जवान हो जाता है!
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तकलीफों में भी हमें मुस्कराना चाहिए क्योंकि मुस्कराने से तकलीफें भाग जाती हैं.
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कुछ लोग अपने को समझदार समझते हैं. हर किसी को अधिकार भी है अपने को समझदार समझने का. लेकिन दूसरे को बेवकूफ तो ना समझो. 
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मुश्किल वक्त में आदमी सबसे पहले अपना आत्म विश्वास खोता है. 
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जिंदगी की उलझनों को सुलझाते-सुलझाते आदमी एक दिन काफी सुलझा हुआ आदमी हो जाता है. लेकिन फिर उसके बाद वह अकेला भी हो जाता है! 
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आदमी जब चारों तरफ से मुश्किलों से घिर-सा जाता है. तो वह राहत के छोटे-मोटे रास्ते तलाशने लगता है. यह सोचकर कि क्या पता किस राह राहत मिल जाए. इसलिए कभी इस राह तो कभी उस राह. ना जाने कितने ही रास्तों से वह गुजरता रहता है. दरअसल वह यह सब इसलिए करता है क्योंकि बाद में वह अफ़सोस नहीं करना चाहता है कि अगर तू उस राह चला गया होता तो 'क्या पता' राहत का एक झोंका मिल गया होता. और ये जो 'क्या पता' है ना, ये आदमी के पैरों में पहिए लगा देता है. फिर आदमी रास्तों पर भटकता रहता है.
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जब लोगों के पास पैसे आ जाते हैं तो बड़े बोल भी आ जाते हैं.
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बुरे वक्त में अच्छी यादें दवा का काम करती हैं.
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कभी-कभी यूं ही मुस्कराकर दुखों को चिढ़ा देना चाहिए. 

Wednesday, July 16, 2008

जीवन का एक लम्हा

कभी कभी जीवन में ऐसा भी लम्हा आता हैं

"खुशी" सामने बाहें फैलाऐ खड़ी होती हैं

आदमी खुलकर उसे गले लगा नही पाता हैं

दिल खुश हो झूमने को कहता हैं

पर दिमाग झट से हाथ पकड़ लेता हैं

दिल और दिमाग के इन अहसासों में

वो खुशी का लम्हा कहीं दब कर रह जाता हैं ।

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