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Tuesday, January 20, 2026

आधे-अधूरे ख्याल-4

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कुछ लोग आपके नजदीकी नहीं होते लेकिन आपके नजदीक होते हैं.
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कोई-कोई खुशी इतनी बड़ी लगती है कि उसके बदले मिली तकलीफें छोटी लगने लगती हैं!
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जब जवान बेटा बीमार हो जाता है, तब बूढ़ा बाप जवान हो जाता है!
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तकलीफों में भी हमें मुस्कराना चाहिए क्योंकि मुस्कराने से तकलीफें भाग जाती हैं.
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कुछ लोग अपने को समझदार समझते हैं. हर किसी को अधिकार भी है अपने को समझदार समझने का. लेकिन दूसरे को बेवकूफ तो ना समझो. 
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मुश्किल वक्त में आदमी सबसे पहले अपना आत्म विश्वास खोता है. 
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जिंदगी की उलझनों को सुलझाते-सुलझाते आदमी एक दिन काफी सुलझा हुआ आदमी हो जाता है. लेकिन फिर उसके बाद वह अकेला भी हो जाता है! 
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आदमी जब चारों तरफ से मुश्किलों से घिर-सा जाता है. तो वह राहत के छोटे-मोटे रास्ते तलाशने लगता है. यह सोचकर कि क्या पता किस राह राहत मिल जाए. इसलिए कभी इस राह तो कभी उस राह. ना जाने कितने ही रास्तों से वह गुजरता रहता है. दरअसल वह यह सब इसलिए करता है क्योंकि बाद में वह अफ़सोस नहीं करना चाहता है कि अगर तू उस राह चला गया होता तो 'क्या पता' राहत का एक झोंका मिल गया होता. और ये जो 'क्या पता' है ना, ये आदमी के पैरों में पहिए लगा देता है. फिर आदमी रास्तों पर भटकता रहता है.
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जब लोगों के पास पैसे आ जाते हैं तो बड़े बोल भी आ जाते हैं.
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बुरे वक्त में अच्छी यादें दवा का काम करती हैं.
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कभी-कभी यूं ही मुस्कराकर दुखों को चिढ़ा देना चाहिए. 

Friday, December 19, 2025

आधे-अधूरे ख्याल-3

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ना किसी को तलब होती हमारी
ना किसी को याद आते हम
सच-सच बताना तुम
क्या इतने बुरे थे हम

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श्रीराम सेंटर के बाहर खड़ी
वो सांवली-सी खड़ी लड़की
सिगरेट के छल्लों से
जिंदगी की उलझनें
सुलझा रही थी शायद.

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गली के उस मोड़ पर
एक पल को ठहर जाता है वो
क्या पता आज भी
चाँद झांकता हो
उस घर के छज्जे से.

💭
वो भी क्या दिन थे लड़कपन के
जब फ्रेम जड़ी उनकी फोटो के पास
एक गुलाब का फूल रख दिया करते थे.

Thursday, December 11, 2025

आधे-अधूरे ख्याल-2

💭
आदमी सोचता है. चलो ये वाला काम किया जाएगा. बहुत दिन हो गए टालते-टालते. फिर आदमी उसे पूरा करने का प्लान भी बना लेता है. उसके हिसाब से चलने भी लगता है. लेकिन फिर कहीं से नीली छतरी वाला आता है. कहता ना बेटा ना. ये इतना जरुरी नहीं. ये वाला काम ज्यादा जरुरी है, पहले इस काम को पूरा कर. फिर आदमी पहले काम को छोड़कर दूसरे जरुरी काम को करने लगता है. वक्त जैसा कहता है वह वैसे ही करने भी लगता है. ये जिंदगी ऐसे ही उलझाए रखती है एक काम से दूसरे काम और दूसरे से फिर तीसरे. और आदमी इन्हीं में सुलझा रहता है बस...

💭
जैसे शब्दों की अंतिम व्याख्या तक पहुंचते-पहुंचते उनके अर्थ बदल जाते है. ठीक वैसे ही उम्र के आखिरी पड़ाव तक आते-आते जिंदगी के मायने बदल जाते हैं.

💭
आपकी तकलीफ में बगल से गूंगे की तरह निकल जाते हैं. वहीं अपनी जरूरत में यही गूंगे बोलने लग जाते हैं.
💭
जिंदगी तकलीफों का समंदर है. वो अलग बात है दिल बहलाने को कभी-कभी ठंडी हवाओं का झोंका भी आता है. 

💭
ख़त सिर्फ कागज पर उतरे अक्षर नहीं होते हैं. वे दो जिंदगियों के साझे दस्तावेज होते हैं.

💭
कभी-कभी वक्त बुढ़ापे में कहता है बेटा जवान हो जा. बिना जवान हुए तकलीफें दूर नहीं होगीं.

💭
अच्छा यार एक बात तो बता.
पूछ.
तुम पति-पत्नी में कभी झगड़ा नही होता?
हा हा!
मैं सवाल कर रहा हूं. और तू हंस रहा है. जैसे मैंने कोई चुटकला सुनाया हो.
ये चुटकला ही तो है. भला कौन मियां-बीबी हैं जो झगड़ते नही.
लेकिन तुम दोनों को झगड़ते तो कभी देखा नहीं.
भई किसी के सामने नहीं झगड़ते तो इसका मतलब ये नहीं कि हम लड़ते नहीं. हम भी झगड़ते हैं. बस यार सालों से एक सहमति-सी बन गई. वो भी बिना बात-वात किए कि जब भी कोई किसी बात पर ग़ुस्सा होगा या नाराज होगा. दूसरा उस वक्त ज्यादा अपनी बात नहीं रखेगा. बहस नहीं करेगा. बस जितना संभव हो सकेगा मामले को शांत करेगा. चाहे उसके लिए गलती ना होने के बाद भी माफी मांगनी पड़े. उस वक्त वो मामला ठंडा ही करेगा. बाद में जब मामला शांत होगा. उस विषय पर फिर से बातचीत होगी. या फिर गुस्सा करने वाले को गलती का अहसास हो जाए. सही में जो गलत होगा वो माफी मंगेगा. माफी के बीच ईगो नहीं आएगी. हम दोनों में एक बात ये भी है कि गलती का अहसास होते ही माफी मांग लेते हैं. चाहे वो हो या फिर मैं. पता है जब कोई दिल से माफी मांगता है तो उसका चेहरा मासूम-सा हो जाता है. उस वक्त उस मासूम से चेहरे को प्यार करने का मन करने लग जाता है. और फिर माथे का बोसा लेने में हम दोनों में से कोई पीछे नहीं रहता. वो अलग बात है कि कभी-कभी हम प्यार में इतना डूब जाते हैं कि एक दूसरे चेहरों को देखते हुए दोनों की आंखों में आंशू आ जाते है. फिर हम  बात या बहस नहीं करते बस प्यार करते हैं. ऐसे हमारा प्यार का संबंध और मजबूत हो जाता है !
ये तेरी बातें किताबों की बातों-सी लग रही हैं. असल जीवन मे ऐसा भला होता है क्या !
ऐसा जीवन में होना चाहिए कि नहीं??

Saturday, July 1, 2023

आधे-अधूरे ख्याल-1

💭

वे अपने-अपने हिसाब से चलते रहे 
वो उनके हिसाब से बदलता रहा! 

💭

रिश्ते 
सब के सब 
अपने-अपने 
खून के साथ 
खड़े हो गए. 

एक वो था 
जो सही के साथ 
खड़ा रहा
और 
अकेला रह गया. 
💭

वो अपने ही घर में 
किराएदार हो गया 
लोग कहते हैं कि 
वो अपनी जिंदगी में 
नाकामयाब हो गया. 

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