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Wednesday, July 16, 2008

जीवन का एक लम्हा

कभी कभी जीवन में ऐसा भी लम्हा आता हैं

"खुशी" सामने बाहें फैलाऐ खड़ी होती हैं

आदमी खुलकर उसे गले लगा नही पाता हैं

दिल खुश हो झूमने को कहता हैं

पर दिमाग झट से हाथ पकड़ लेता हैं

दिल और दिमाग के इन अहसासों में

वो खुशी का लम्हा कहीं दब कर रह जाता हैं ।

Saturday, June 28, 2008

जीवन क्या है?

जीवन


जीवन क्या हैं?

मैं अक्सर सोचता हूँ

क्या?

जीवन एक पाठशाला है

इसका एक हेड्मास्टर भी होता है

पाठशाला में हम

हंसते है रोते हैं

खेलते है गाते है

हर कक्षा में नये नये पाठ पढ़ते जाते है

पाठशाला हमारा इम्तिहान भी लेता है

हम पास होते है फेल होते है

और कभी हम कम्पार्टमेंट भी होते है

यहाँ हम साथी भी बनाते है दुश्मन भी बनाते है

किसी ने अगर प्यार की घंटी बजा दी

तब उसे अपना जीवन साथी बनाते है

पाठशाला के कुछ कयादे नियम भी होते है

कभी उन्हें तोड़ हम खुश होते है

कभी उन्हें तोड़ हम पशताते हैं

फिर एक दिन ऐसा भी आता है

जब हम ना चाहते हुए यह स्कूल छोड़ जाते है

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