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Tuesday, April 21, 2009

चुनावों के बीच एक बात कहनी है।

नेताजी

चुनावों का शंखनाद हो चुका
नेताजी की नींद अब टूट चुकी।
तैयार हैं सब अब
अपने अपने हथियारों से
कोई वादों से बहका रहा,
कोई भावनाओं को भड़का रहा।

जिसे देखो वही बड़ी-बड़ी बातें करता हैं
पर अपने ऐशो-आराम का पूरा ख्याल भी रखता हैं।
धूल से पैर ना सन जाए
इसलिए मँहगी गाड़ियों और हैलिकाप्टरों से दौरा करता हैं।

बातें गरीबों की खूब करता हैं
फिर ना जाने क्यों ?
करोड़ो रुपये अपने पास भी रखता हैं।
सत्ता के लालच में
दुश्मन को दोस्त
दोस्त को दुश्मन बनाया करता हैं।

मिल जाए जब सत्ता
होकर आम जनता से दूर
आलीशान कोठियों और दफ़्तरों में
सत्ता का रस पीया करता हैं।

आओ फिर भी वोट करें
अपने नेता के काम को
लौकतंत्र की तराजू में तौल चलें।
जिस जिस नेता ने दिखाई हो होशियारी
उनकी तो आँखे खोल ही चलें।

Thursday, August 7, 2008

बुत

बुत 
देखो उस बुत को
कैसा चमक रहा हैं
कितनी जगह घेरे हैं
कितना पैसा खर्च किऐ हैं
अपनी शान के नाम पर
बिल्कुल तुम्हारी तरह

कुछ समय बाद देखना उस बुत को
कोई थूकेगा
पक्षी बीट करेगे
बच्चे पत्थर से हिट करेंगे
अपना निशाना ठीक करेंगे

इसलिए
नेताओ
अब भी समय हैं
संभल जाओ
कुछ ऐसा कर जाओ
आने वाली पीढ़ियाँ नाज करें
शान से तुम्हारी बात करें

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