Sunday, March 22, 2026

सुनो, पता है तुम्हें

16.

सुनो 
पता है तुम्हें 
कोई-कोई इंसान 
किसी के लिए बोझ हो जाता है 
कुछ को नापसंद हो जाता है 
और 
बहुतों की आंखों की किरकरी बन जाता है. 

17.
सुनो 
पता है तुम्हें 
कभी-कभी 
99 हां पर 
1 ना 
इतनी भारी हो जाती है 
कि रिश्ते-दोस्ती-संबंध 
सब के सब टूट जाते हैं.

18.
सुनो 
पता है तुम्हें 
लोग केवल 
उन्हें ही 
बेवकूफ 
नहीं समझते 
जो वाकई में 
कम-अक्ल होते हैं.
लोग उन्हें भी 
बेअक्ल समझते हैं 
जो अपने जीवन में 
नाकामयाब होते हैं.
और 
एक तुम थी जो मुझे 
अच्छा 
समझदार 
ग़मख़्वार
इंसान समझकर प्यार कर बैठी थीं. 

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