तलाश

किसी को फसल के अच्छे दाम की तलाश,किसी को काम की तलाश,किसी को प्यार की तलाश, किसी को शांति की तलाश, किसी को खिलौनों की तलाश,किसी को कहानी की तलाश,किसी को प्रेमिका की तलाश, किसी को प्रेमी की तलाश,................ तलाश ही जीवन है

Wednesday, November 26, 2008

पंजाब की प्रेम कविताएं

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पिछले महीने एक किताब पढ़ी थी "ओ पखुंरी" जिसमें दी हुई कविताएं बहुत ही खूबसूरत थी पर तीन कविताएं दिल को छू गई और मैंने अपनी डायरी म...
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Thursday, November 6, 2008

कोई हिजड़ा कह बुलाता और कोई किन्नर कह पुकारता , लेकिन कोई भी अपना कह नही दुलारता हमें।

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एक ही कोख से जन्में हम एक ही खून से बनें हम भूख लगती तो खाना खातें हम दुख होने पर रोते हम खुश होने पर हँसते हम एक ही मिट्टी में मिलते आ...
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Monday, November 3, 2008

यह दीपावली भी आई और चली गई।

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ऐसी रही मेरी दीपावली हर बार की तरह यह दिवाली आई और चली गई। बेटी अब समझने और जानने लगी हैं। इसलिए उमंग थी, खुशी थी, और मेरी नैना की मुस्...
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Monday, October 20, 2008

एक लड़की की कहानी

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वह लड़की एक पहेली थी कहने को तो इसकी ढ़ेरों सहेली थी फिर भी यह अकेली थी। मुस्कराती थी, खिलखिलाती थी, देर तक बतियाती थी पर ना जाने अकेले म...
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Thursday, October 16, 2008

प्रेम करने वाली लड़की

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प्रेम करने वाली लड़की प्रेम करने वाली लड़की अक्सर हो जाती है खुद से गाफ़िल और दुनिया को अपने ही ढ़ग से बनाने-सँवारने की करती है कोशिश। प्रेम क...
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Thursday, October 2, 2008

माँ

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एक दिन मैं साहित्य अकादेमी की लाईब्रेरी में हिंदी की पत्रिकाओं को उलट - पुलट रहा था। तो वहाँ किसी पत्रिका में एक कविता ...
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दो अक्तूबर, दो इंसान, और दो बातें

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दो अक्तूबर और दो महान इंसान आज दो अक्तूबर हैं दो महान इंसानो का जन्मदिन । एक ने सत्य और अहिंसा का संदेश दिया। दूजे ने सरलता औ...
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Sunday, September 28, 2008

कल बेटी का जन्मदिन मनाया, आज भगत सिंह का जन्मदिन मनाऐंगे।

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भगत सिंह को याद करते हुए , आ ओ मनाएं उनका जन्मदि न। अपना पेट तो पशु सरीखा, हर कोई हर दम भरता । धन्य जीना उस महापुरुष का, दूस...
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Thursday, September 25, 2008

यह है काल सेंटर की दुनिया

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काल सेंटर बड़ी सी यह काँच की इमारत दिखती हैं बड़ी चमकली हैं। जहाँ खिलती टेलिफोन पर खट्टी-मिट्ठी बातों की फुलझड़ी हैं । कोई माल बेचता क...
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Sunday, September 21, 2008

लगता हैं तुम इंसान नहीं।

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जिधर देखो इंसान के सपनों का खून हो रहा। समझ नहीं आता कि क्यों इंसान को इंसान मार रहा। रोज ही ऐसा मंज़र देखने को मिल रहा दुनिया के अलग-अलग क...
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बुल्ला कि जांणा मैं कौन?

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सुशील छौक्कर
अपने माँ पिता का सुशील बेटा
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