Monday, June 21, 2010

तेरे जैसा यार कहाँ...........

कुछ इंसान यूँ मिलते हैं कि उस नीली छतरी वाले की तरफ मुँह उठाकर पूछना पड़ता हैं कि यार गज़ब खेल है तुम्हारा। और फिर उस इंसान से ऐसा तालमेल बैठता है कि आप याद करें या वो, मोबाइल की घंटी बज ही उठती हैं। जैसे अभी अभी हवाओं के साथ संदेश गया हो कि यार आपका दोस्त याद कर रहा हैं आपको। और हम फिर से मुँह उठाकर उस नीली छतरी वाले की तरफ देखते हैं और कहते हैं ................. तो आज उन्हीं दोस्त की एक रचना पेश कर रहा हूँ जो मेरे जन्मदिन पर पिछले साल लिखी गई थी। और यह रचना मुझे हर वक्त हौंसला देती हैं पिछले काफी दिनों से ब्लोग की इस प्यारी दुनिया से कुछ दूर था तो कई साथियों के संदेश आये कि क्या बात हैं उन्हीं के प्यार की बदौलत अपनी हाजिर लगाने आ गया हूँ अपने प्यारे दोस्त का तौहफा आप सबको दिखाने। अब आप सोच रहे होंगे ये दोस्त कौन हैं तो कुछ देर सोचिए फिर आगे बढिए और नाम जानिए। और हाँ साथियों अभी कुछ दिनों के लिए और दूर रहना पडेगा आप सब साथियों से, उसके लिए माफी चाहूँगा साथियों।


तुम निडर हो, तुम अडिग हो
पथिक तुम, चलते जाना।

जीवन पथ की दुख व्यथा से
तनिक भी न तुम घबराना।

इस प्रलय के वक्ष स्थल पर  
चढ़कर तुम हुंकार लगाना। 

हँसते रहना, चलते रहना
दुख को अमृत सा पी जाना।

तुम शक्ति हो, तुम भक्ति हो
धर विश्वास तुम बढ़ते जाना।

सच्चे मन से मीत तुम्हारे लिए
मेरी बस यहीं शुभकामना।
                              अमिताभ श्रीवास्तव

अमिताभ जी आजकल तो रोज ही गुनगुनाता हूँ आपके इन शब्दों को। 

12 comments:

वन्दना said...

सच्चे दोस्त ही तो मुश्किल के वक्त मे सबसे बडा सहारा होते हैं…………………और ये अल्फ़ाज़ तो आगे बढने को प्रेरित करते हैं………………बहुत ही सुन्दर रचना………………आप जल्द से जल्द ब्लोग जगत मे वापस आयें यही कामना है।

सुलभ § Sulabh said...

बहुत दिनों बाद आपकी पोस्ट पर नज़र पड़ी तो सीधा चला आया और हाँ यहाँ आकर हौसला भी खूब मिला.

राज भाटिय़ा said...

बहुत खुब जी, कविता बहुत अच्छी लगी

ajit gupta said...

अच्‍छी रचना।

नीरज जाट जी said...

साहब,
इतने दिनों में एक छोटी सी पोस्ट लिखने में भी टाइम ढूंढ रहे हो? देख लीजिये, सप्ताह में कम से कम दो पोस्टें आनी ही चाहिये।
बहुत अच्छी लगी यह हौसला आफजाई युक्त रचना!!

सुधीर महाजन said...

Amitabhji ki panktiya urja ka punj pratit hoti hai.. sabhi sudhi pathko ke liye josh ki rawani bhi hai...!
Aapke mitra bhi hamare mitra hai so aap bhi hamare mitra hi hue na.
visit kare-
www.sudhirmahajan.blogspot.com
Aapke comments meri prerna hogi.
Shubhkamnae..!

अल्पना वर्मा said...

अमिताभ जी एक बहुत ही अच्छे रचनाकार और एक अच्छे इंसान हैं .अच्छे लोगों को दोस्त भी अच्छे मिलते हैं .आप दोनों की दोस्ती हमेशा यूँ ही बनी रहे.शुभकामनायें.
आप को उनकी भेंट उन्हीं की लिखी यह रचना बहुत ही अच्छी और प्रेरणादायक है.

अल्पना वर्मा said...

@..oho ..नैना आज कल मम्मी ki हेल्प karne लगी है..क्या बात है?keep it up!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

अमिताभ श्रीवास्तव जी की रचना पढ़वाने के लिए शुक्रिया भाई.

शरद कोकास said...

अच्छा है

सुधीर महाजन said...

Shushilji Amitabh hamare bhi mitra hai is naate aap bhi hamare mitra hi hue na..! Hamara pahla salam kubul kare.Aap hamare blog pr aaye achha laga.Commerce ka professor hu.kavita ki jyada samaz nahi rakhta .bus ek chintan hai.
Bitiya ko sneh.

मीत said...

ek pal ko laga jaise ye rachna mere liye hai..
bahut sunder...
इस प्रलय के वक्ष स्थल पर
चढ़कर तुम हुंकार लगाना।
keep it
meet

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