Tuesday, April 13, 2010

12 अप्रैल का दिन

आज का दिन खास हैं
सबको प्यारा सा अहसास हैं
आज के दिन खिली थी एक कली
एक गाँव के गौबर से पूते आँगन में।

देखकर दुनिया यह हल्की सी मुस्कराई थी
चारपाई पर लेटे-2 नन्हें पैरों से फिर साईकिल चलाई
पग-पग चलती रही, धीरे-धीरे बढ़ती रही ।

सहेलियों संग गिटों से खेलती रही
आईस-पाईस में छिपते छिपाते
गाँव की पाठशाला में क ख ग घ पढती रही
गुड्डे गुडिया की दुनिया भी बसाती रही।

जब आई बाली उम्र
छोटे बड़े सपने सतरंगी बुनती रही
पर जब देखी परम्परा की रीति
सीखी कढ़ाई-बुनाई और खाने की विधि
माँ ने याद दिलाई दादी की बातें
"बेटियाँ होती हैं पराई"
डोली में बैठकर फिर सजन घर चली।

पर उसने दूसरी राह भी सपनों में रची थी
जब वह अपने नाम से जानी जाऐगी
रुढ़ियों की छाया से दूर होकर
अपनी एक अलग पहचान बनाऐगी
इसलिए साथ उसने यह दूसरी राह भी चुनी
करके एम. ए, लगी वो फिर बच्चों को पढ़ाने।

फिर वो दिन भी खास होगा
जब गर्व का अहसास होगा
जब ये कली पूरा फूल बनेगी
मैडम से प्रिंसीपल मैडम बनेगी।

17 comments:

kshama said...

फिर वो दिन भी खास होगा
जब गर्व का अहसास होगा
जब ये कली पूरा फूल बनेगी
मैडम से प्रिंसीपल मैडम बनेगी।
Anek shubhkamnaon sahit..aameen!

Vijay Kumar Sappatti said...

susheel ji ,

badi jabardasht composition hai bhai .... padhkar iraado ki mazbooti pata chali ...

bhai , meri bhi badhyi sweekar kariye...aur mithayi taiyaar rakhiye ....

aapka hi
vijay

अल्पना वर्मा said...

'माँ ने याद दिलाई दादी की बातें
"बेटियाँ होती हैं पराई"
डोली में बैठकर फिर सजन घर चली।'
-१२ एप्रिल जनमदिन किसी ख़ास का है..कविता पढ़कर लग रहा ही की आप की बहन हैं.उन्हें हमारी तरफ़ से जनमदिन की बहुत बहुत बधाई और
' मैडम से प्रिंसीपल मैडम बनेगी।'-.बिल्कुल..-शुभकामनाएँ.
****बहुत ही सुंदर कविता भेंट की है आप ने.

अल्पना वर्मा said...

@नैना ,आप सही कह रही हो.आप की मम्मी से बात करेंगे हम ..ओके?
आप को सारी किताबें अपनी निगरानी में दें देंगी...
:)be happy and keep smiling!

Udan Tashtari said...

अनेक शुभकामनाएँ.

अमिताभ श्रीवास्तव said...

roman me likh kar tippani dene me ab mazaa nahi aataa ji, isliye..baad me likhenge..ghar par beth kar..kavota padhhi, fir padhhi..fir padhhi..kyaa behatreen he..//shesh ghar se likhungaa...

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत सुन्दर पंक्तियाँ लिखी है आपने सुशील जी बधाई और शुभकामनाएं

सुशील कुमार छौक्कर said...

अल्पना जी कल नैना की मम्मी का जन्मदिन था।

Manish Kumar said...

chaliye ek sath do kiye aapne is kvita se humein aur bhabhiji ko ek sath khush kar diya.

meri taraf se bhi unhein janmdin ki hardik badhai.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

@ बेटी की बातें
चिंता की कोई बात नहीं..बस परीक्षाएं पास आने दो. सारी किताबें तुम्हें ही लौटा दी जाएंगी और उन्हें पढ़ने कि लिए जो जान खाई जाएगी वो अलग :)

हरकीरत ' हीर' said...

कविता पढ़ के ही समझ गयी थी कि किसी न किसी का जन्मदिन तो है ...पर मेरा ध्यान पहले आपकी बहन की ओर गया ...बचपन का ज़िक्र था न ....
खैर .....भाभी जी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं ....
दुआ है वे आकांक्षाओं को पूरा करते हुए एकदिन प्रिंसिपल के पद पे भी पहुंचे .....!!.

शरद कोकास said...

इस आशावाद को सलाम ।

मीत said...

आपने जिनके लिए यह कविता लिखी है... उन्हें लाख बधाई....
और इश्वर से कामना करता हूँ की जल्दी ही वो आपका सपना पूरा करें....
कविता बेहद ही ख़ास है... और इसकी तारीफ़ के लिए शब्द नहीं हैं मेरे पास...
मीत

आशीष/ ASHISH said...

Mazboot aur nek irade!
Eeshwar kare ki saakaar ho!
Shubhkamnaen!

कविता रावत said...

फिर वो दिन भी खास होगा
जब गर्व का अहसास होगा
जब ये कली पूरा फूल बनेगी
मैडम से प्रिंसीपल मैडम बनेगी।
.....bachpan se lekar ab tak ki yaad taaji kar dee aapne..
Shubhkamnayen

abhi said...

कविता पढ़ के समझ तो आ ही गया था की किसी न किसी का जन्मदिन जरूर है लेकीन अभी कमेन्ट पढ़ के पता भी चल गया की जन्मदिन किसका था ....खैर लेट से मुबारकबाद देने के लिए क्षमा चाहता हूँ.....भाभी जी को बिलेटेड हैप्पी बर्थडे :) कविता शानदार थी

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