Saturday, March 8, 2008

लड़के होने की दवाई

आज सुबह घरवाली बोली कि मेरी सहेली के लड़का हुआ है। पता है उसने लड़के होने कि दवाई खाई थी और पता है दीदी भी लेके आई है लड़का होने कि दवाई। मैं बोला कि अब तो लड़के चाहने वालो को मन्दिर नही जाने पड़ेगा। और इतेफाक देखो कि आज महिला दिवस है आज पता नही क्या क्या लिखा जाएगा, क्या क्या दिखाया जाएगा,और क्या क्या ब्लॉग में पोस्ट किया जाएगा मेरी भी इक पोस्ट शामिल हो जायेगी बस। रात होगी फ़िर सूरज निकलेगा और जीवन जीने के लिए मारा मारी शुरू होगा । मैं भी सोचता था पता नही क्यों लोग लड़की नही चाहते? परन्तु धीरे धीरे कुछ कुछ समझ आने लगा शायद मैं ग़लत हो सकता हूँ और सही भी। मेरे भी एक लड़की है जब शादी नही हुई थी तो सोचता था कि मेरे इक लड़की होगी तो उसका नाम कल्पना रखूंगा और लोगो को दिखा दूंगा कि लड़की बोझ नही होती मेरी कल्पना पुरी हुई और देखो आगे क्या क्या होता है जब हमारी नैना (मेरे लिए कल्पना) हुई तो किसी ने अफ़सोस किया किसी ने तसल्ली दी। मेरे मम्मी पापा सास ससुर पत्नी आदि सभी को एक लड़का चाहिए था मेरे मम्मी बोली मेरा बेटा दब गया बोझ तले.तब एक कविता लिखी थी नैना के नाम से और अपने ब्लॉग की शुरुवात भी उसी से की मुझे लगता है कि लड़की होने में किसी को कोई परेशानी नही है परन्तु इससे जुड़ी समाजिक रीति रिवाज, सामाजिक बनावट से परेशानी है सबसे पहले शादी पे आने वाला खर्च ही ज्यादा जिम्मेवार है जब ज्यादा खर्च नही कर सकते तो आपकी लड़की की शादी जल्दी नही होगी और समाज के लोग और रिश्तेदार कहने लगेगे कि अभी तक लड़की की शादी नही की। जब लड़की बुढी हो जायेगी तब करोगे शादी लड़की की। तब माँ बाप हिम्मत नही जुटा पाते वो सर झुका लेते है बस और पुरा परिवार चिंता में डूब जाता है अभी अपने साले की शादी में गया वंहा शादी पे खूब पैसा खर्च किया गया था और लड़की वालो की चारो तरफ खूब वाह वाही हो रही थी। शादी में लड़के वालो को क्या क्या मिला जरा उस पर नजर तो डाल ले १. एक १०/१२ लाख की गाड़ी २.कुछ लाख कैश ३.एक किलो सोना ४.सैकडो जोड़ी कपडे बाकि का समान का अंदाजा आप ख़ुद लगा सकते है। दूसरा कारण है बुढापा । आज समाज बहुत ही संवेदनहीन हो गया है हर माँ बाप चाहता है कि बुढापे में उसको किसी के आगे हाथ ना फैलाना पड़े कभी हारी बीमारी हो तो कोई देखभाल करने वाला हो। जिस दिन समाज शादी के खर्च कम कर देगा और लोग एक दुसरे की दिल से सहायता करने लगेगे। उस दिन ओरते लड़के होने की दवाई नही खायेगी और आदमी भूर्ण हत्या नही करायेगे । शुरुवात पहले ख़ुद से ही करनी होगी

1 comment:

rajivtaneja said...

सही है....आम आदमी का खर्चे के नाम से ही दम फूलने लगता है।
जब तक हम अपनी शादी-ब्याह में अत्याधिक दिखावा करने जैसी कुरीतियो का खत्म नहीं करेंगे...तब तक लड़के ही पूजे जाते रहेंगे और
शर्तिया लड़का होने की दवाई बिकती रहेगी

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